कीमत आंसुओं की तुम चूकाओगे क्या। New Ghazal
कीमत आंसुओं की तुम चूकाओगे क्या।
आंसू सुखे हैं अभी और रुलाओगे क्या।।
दिल की जज्बातों को तुम समझ पाते नहीं।
दिल के रिश्ते को तुम समझ पाओगे क्या।।
इतना आसान नहीं है मोहब्बत का सफर।
इन रास्तों पर उम्र भर चल पाओगे क्या।।
सुना है आजकल तुम कवि हो गए हो।
मेरी भावनाओं को लिख पाओगे क्या।।
दर्द औ गम जो खाई है मैंने तन्हाइयों में।
बनाकर ग़ज़ल उसे तुम सुनाओगे क्या।।
औ बहते हैं जो ख्वाब मेरे अश्क बनकर।
उन ख्वाबों को दिल में सजाओगे क्या।।
नसीबों से मिलते हैं हमसफर जिंदगी के।
अपना हमसफर मुझे बनाओगे क्या।।
जन्मों जन्मों का है रिश्ता हमारा।
हर जनम में मेरा साथ निभाओगे
क्या- जी एल..
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