Shayari and ghazal
| Yadon ka sawan |
मां सरस्वती को प्रणाम करता हूं!
आप सभी को नमन !
मंच को चरण स्पर्श !!
मैं चार-चार लाइनों से आप से जुड़ने का प्रयत्न करूंगा!!
सुनिएगा......
१)कभी दुनियां से हारा तो तुम्हारे पास आता हूं!
कभी गम ने पुकारा तो तुम्हारे पास आता हूं!!
कभी तन्हां जो बैठूं तो तुम्हारी याद आती है!
कहर यादें जो ढाती हैं तुम्हारे पास आता हूं !!
२) मेरा दिल सूना सूना है तेरी यादें सताती है !
तड़प उठता हूं मैं अब भी अगर तूं रूठ जाती है !
कि मर जाऊंगा मैं इक दिन तेरी चाहत में ओ यारा !
अब तो महफिल में भी तेरी याद सताती है !!
३) सफर तेरी मोहब्बत की बड़ी हसीन लगती है !
तेरी चाहत में ये दुनियां बड़ी रंगीन लगती हैं !
मेरी चाहत को ऐ मेरे खुदा सलामत यूं ही रखना !
कि उनकी यादों में जहां संगीन लगती है !!
४) अगर तेरी मोहब्बत में, मर जाऊं तो क्या गम है !
समेटो तुम अगर दिल से बिखर जाऊं तो क्या गम है !!
तेरा दिल ही मेरा आशियाना है सनम अब तो !
मेरी मंजिल तो तू ही है इधर आऊं तो क्या गम है !!
-जी.एल.
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और अंत में मैं एक ग़ज़ल सुना कर अपना स्थान ग्रहण करूंगा !...
चूंकि आज पितृ दिवस है इसलिए यह ग़ज़ल पिता को समर्पित है....
निवेदन करता हूं.......
रहता है हर लम्हां मेरे करीब सा कोई !
रहनुमां बनके मिला है नजीब सा कोई !!
रख दे सर पे हाथ तो जन्नते नज्म मिल जाये!
खुशियों से भर जाता है गरीब सा कोई!!
झुकता हूँ जितना चरणों में उतना ऊपर उठता हूँ !
दुआओं में असर है उनके अजीब सा कोई !!
उलझती है जब जिन्दगी के पन्ने ऐ "जी.एल." !
याद आता है उस वक्त अजीज सा कोई !! -जी.एल
*नजीब-कृपालु
*नज्म-तारा
*अजीज-आदरणिय
बहुत बहुत धन्यवाद!!🙏🙏

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