Poem on labour day/ हिंदी कविता इक खामोशी
आज की युवा पीढी़ के दर्द को बयां करती एक कविता!" **************************** . इक खामोशी --------------------------- मुस्कराते अधरों के पीछे, छिपी हुई इक खामोशी ! तमन्नाओं की उम्र में , तजुर्बे देती इक खामोशी!! बचपन कब बीत गया , जिम्मेदारियों के बोझ तले! चन्द कागजी टुकड़ों के लिए, अनवरत रही इक खामोशी!! आत्मा जला के दर्द में, सिसक रही ये जीन्दगी! विरोध के समभाव में , इख्तियार है इक खामोशी!! काँपते हाथों का सहारा , माँ-पिता के आँखों का तारा! लड़खड़ाते इस जिन्दगी का, सम्बल बनी इक खामोशी!! थक गये कर,करके इबादत, खुदा कहीं दिखा नहीं ! डूब कर अश्क-दरिया में, इबारत हुई इक खामोशी!!!- जी.एल. Ikk khamoshi! muskaraate adharon ke peechhe, chhipee huee ik khaamoshee !...