मृत्यु भोज Sad hindi story


                                  मृत्यु भोज:-

आज उसके घर में सुबह से ही लोगों का आवागमन था ! कुछ रिश्तेदार तो एक-दो दिन पहले ही आ गए थे! सभी लोग सामान्य तरीके से अपने-अपने काम में लगे थे! लेकिन कोने में बैठी मां का आंचल सूना था पिताजी जो सीने में दर्द को दबाए हुए थे उनके आंखों और आंसुओं में द्वंद  चल रहा था मानो वह आंखों से बाहर आना तो चाहती थी मगर उन्होंने उसे जबरन रोक रखा था !बहन एक कोने में बैठी सुबक रही थी! उसके हाथों में लगी मेहंदी से कोई खुशबू नहीं आ रही थी! हालांकि उसके आंसुओं से धुल कर वो और भी लाल प्रतीत हो रही थी! और पत्नी संध्या बेसुध सी पड़ी थी! उसे अब भी यकीन नहीं हो रहा था कि उसकी दुनिया अब इस दुनिया में नहीं रहा ,वो कभी रोती तो कभी मूर्छित होकर बिस्तर पर  गिर जाती!

 
अभी एक वर्ष पहले ही स्वप्निल और संध्या की शादी हुई थी। और आज उसका मृत्यु भोज था। लोगों के लिए यह केवल एक कार्यक्रम था। लेकिन पूरे परिवार के लिए एक बोझ था ! जिसे लोग भोज समझकर खा रहे थे! अब पाठक खुद ही विचार कर सकते हैं कि मृत्यु भोज कितना सार्थक होता है। आज से ठीक 13 दिन पहले उसकी बहन पलक की शादी थी। स्वप्निल बहन की शादी को लेकर काफी उत्साहित था! निमंत्रण बांटने से लेकर सारी तैयारियों में वह जुटा रहा। शादी वाली रात बारात आई शादी की रस्में शुरू हुई। इसी बीच किसी चीज की कमी हुई तो स्वप्निल उसे लेने बाइक उठा कर तुरंत चल दिया! पर क्या पता था कि खुदा को कुछ और ही मंजूर है। उसका ट्रक से एक्सीडेंट हो गया इधर बहन के फेरे की तैयारी चल रही थी और उधर भाई इस दुनिया में नहीं रहा। जब यह बात पिता रामचंद्र को पता चली तो वह स्तब्ध रह गए लेकिन बेटी की सात फेरों के लिए किसी से कुछ नहीं बोला। दर्द को सीने में छुपाए जब बेटी को विदा किए वहीं पर बेसुध होकर गिर पड़े!


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