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Poem on labour day/ हिंदी कविता इक खामोशी

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आज की युवा पीढी़ के दर्द को बयां करती एक कविता!" ****************************                       .  इक खामोशी                 --------------------------- मुस्कराते अधरों के पीछे, छिपी हुई इक खामोशी ! तमन्नाओं  की  उम्र  में , तजुर्बे देती इक खामोशी!! बचपन  कब  बीत  गया , जिम्मेदारियों के बोझ तले! चन्द कागजी टुकड़ों के लिए, अनवरत रही  इक  खामोशी!! आत्मा जला के  दर्द  में, सिसक रही ये जीन्दगी! विरोध  के  समभाव  में , इख्तियार है इक खामोशी!! काँपते  हाथों  का  सहारा , माँ-पिता के आँखों का तारा! लड़खड़ाते इस जिन्दगी का, सम्बल बनी  इक  खामोशी!! थक गये कर,करके इबादत, खुदा  कहीं  दिखा  नहीं  ! डूब कर अश्क-दरिया में, इबारत हुई इक खामोशी!!!- जी.एल. Ikk khamoshi! muskaraate adharon ke peechhe, chhipee huee ik khaamoshee !...

Hindi poem on Blind person/ दृष्टि बाधित पथिक

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दृष्टि बाधित पथिक  ************* वो अविरल धारा सी चलता, कदम बहकते फिर संभलता ! उसको न कभी शिकायत थी उससे , वाणी में थी मधुर तरलता !! स्याह अंधेरो को चीरता , सत्य के पथ पर चलता ! वह अदना सा पथिक , अपनी धुन में चलता जाता !! वो अविकल मुखमंडल भोला सा, मानो आसमान में डोल रहा हो! तारों को पद विरक्त किये, बादलों को टटोल रहा हो! पथप्रदर्शक सलिके लकुटी टेकता जाता! वह नभ का सा पथिक , अपनी धुन में चलता जाता !! छायी नैनों में स्याह अँधेरा , दिवा है क्या निशा है क्या ! चकाचौंध सतरंगी दुनिया की, लगता उसको तम सा !! होकर नतमस्तक प्रभु को, खुद को अर्पण करता जाता !! होकर तन्मय प्रभु भक्ति में, प्रेम मगन चलता जाता !! मन में है कोई भेद नहीं, है मानवता से अनभिज्ञ नहीं ! राम नाम का जाप करते , सबसे प्रेम से मिलता जाता ! ब्रह्म बेला से साँझ बेला तक, मदमस्ती में चलता जाता !! वो अदना सा पथिक , अपनी धुन में चलता जाता !! वो दृष्टिबाधित पथिक , अपनी धुन में चलता जाता !!- जी. एल. Drishtibadhit pathik vo aviral dhaara see chal...

Hindi poem on brother,एक भाई अभी और है!

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एक भाई अभी और है!          दिल के किसी कोने में ये बात याद रखना , चाहतों के समुन्दर को यूं ही सजाकर रखना ! हर तरफ से भूल कर मुझे तुम्हे करना यहीं गौर है , एक भाई अभी और है! एक भाई अभी और है !! जिंदगी में आ जाये कितनी भी हरियाली, मिल जाये कोई सूरत मुझसे भी भोली भाली! कर दरकिनार मुझको देकर मुझे गाली, मना लेना मेरी पुण्यतिथि पर खुशियों की दिवाली! हर तरफ से भूल कर मुझे तुम्हे करना यहीं गौर है !! एक भाई अभी और है! एक भाई अभी और है !! जाने कितने सपने तेरे दिल में सजेंगे, जिंदगी में मुझसे अच्छे भाई और मिलेंगे! होगी समा सुहानी मधुगीत बज उठेंगे, श्रद्धाजली में मेरे कुछ दीप जल बुझेंगे !! तब कहना अपने दिल से ये दिल मांगे मोर है ! एक भाई अभी और है! एक भाई अभी और है !! जब अर्थी उठेगी मेरी तब आंसू ना बहाना , मन में उठे क्लेशों को दुनिया को ना दिखाना ! निकले नयन अश्रुओं को यू व्यर्थ ना गवाना , मेरी चिता पर अर्घ्य कर उसे मेरी प्यास बुझाना ! फिर भुला देना ये कहकर वो कोई और था !! एक भाई मेरा और था ! एक भाई मेरा  और ...

New love shayari, lovely shayari

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New love shayari आंखों की बातचीत:- १)उनका चेहरा मुझे देखकर यूं मुस्कुरा दिया, मानों किसी ने अमृत रस छलका दिया! पहले उन्होंने थोड़ा रहम खाया मुझ पर, फिर नाराजगी से सर झुका लिया!! Unaka chehara mujhe dekhakar yoon muskura diya, maanon kisee ne amrt ras chhalaka diya! pahale unhonne thoda raham khaaya mujh par, phir naaraajagee se sar jhuka liya!! २)हमने भी खामोशी से सर झुका लिया, मानों अपराधी ने खुद को छुपा लिया! सोचा मेरे प्रति उनका क्या नजरिया होगा, शायद किसी ने उन्हें मुझ पर खफा किया होगा!! Hamane bhee khaamoshee se sar jhuka liya, maanon aparaadhee ne khud ko chhupa liya! socha mere prati unaka kya najariya hoga, shaayad kisee ne unhen mujh par khapha kiya hoga!! ३)मन में अन्तर्द्वन्द का युद्ध सा होने लगा! दिल का ख्वाब दिल में ही रोने लगा! सोचा आसमां से नाराज़ कैसे कोई परिंदा होगा, मन को मार कर भी कैसे कोई जिंदा होगा!! Man mein antardvand ka yuddh sa hone laga! dil ka khvaab dil mein hee rone laga! socha aasamaan se naaraaz k...

Poem on Corona Virus, Hindi Kavita on corona,कोरोना वायरस कविता

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Poem on Corona Virus ऐ कोरोना! ऐ कोरोना बता तेरी रजा क्या है?  मौत के अलावा तेरी सजा क्या है? जूझ रही जिंदगी बंद कमरे में आज!  कल इसके जीने की सच्ची वजह क्या है ? मैं कहता हूं तू रहना सीख ले  सलीके से ! निर्दोषों को मारने में मजा क्या है ? मिटाना है तो मिटा उन दरिंदों को ! इंसानी दुश्मनों को मिटाने में इल्तजा क्या है ? त्राहिमाम कर रही दुनिया तेरे कहर से! अब तू ही बता तेरी दवा क्या है? -जी. एल. Poem on Corona Virus ai korona bata teree raja kya hai?  maut ke alaava teree saja kya hai? joojh rahee jindagee band kamare mein aaj!  kal isake jeene kee sachchee vajah kya hai ? main kahata hoon too rahana seekh le  saleeke se ! nirdoshon ko maarane mein maja kya hai ? mitaana hai to mita un darindon ko ! insaanee dushmanon ko mitaane mein iltaja kya hai ? traahimaam kar rahee duniya tere kahar se! ab too hee bata teree dava kya hai? English version: Hey corona, what is your law?  ...

Pagli ladki Hindi poem, पगली लड़की

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पगली लड़की  ************ उनकी यादों का सावन जब दिल में बस जाती है! जब नाम 'प्रियु' का दिल की धड़कन बन जाती है!! जब थका हांरा सूरज क्षितिज में ढल जाता है! जब अम्बर में चंदा को, जी देख देख ललचाता है!! जब सुबह से शाम टक एक नाम जुबां पर होता है! जब महफ़िल में होकर भी एक दिल तड़प के रोता है!! तब उसकी यादों के बिन जीना दुस्वारी लगती है! और वो पगली लड़की कुछ और भी प्यारी लगती है!! जब चांदनी रातों में शशि नभ में शोभित होता है! जब नीले अम्बर में तेरा चेहरा सुरभित होता है!! जब ओस की बुँदे कलियों को छू जाती है! जब मोतियों की कतारें धरती पर बिछ जाती है !! जब मंद हवा के झोके गालों को सहलाती है ! जब बागों में कोयल तेरी यादों का गीत सुनाती है!! जब मेहंदी लगे हाथो की स्पर्श सुहानी लगती है! जब लौकिक प्रेम की भाषा दिल को रूहानी लगती है!! जब मुस्करना उसका जान से प्यारी लगती है! तब उस पगली लड़की के बिन जीना दुस्वारी लगती है! और वो पगली लड़की कुछ और भी प्यारी लगती है!! जब अम्बर में चहुँओर घटा घनघोर गरजते है! जब प्यासी धरती पर मृदु बूँदें बरसती है!! ज...

Poem on Surat Agni kand,सुरत अग्नि कांड

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ये कविता नहीं दर्द के प्याले हैं! एक कवि की कलम पे उभरे हुए छाले हैं!!”- जी. एल. सुरत अग्निकांड के मौत के मंजर को चरितार्थ करती ये चंद लाइनें: Poem on Surat Agni kand: देखते रहे मौत का मंजर हाथों में दूरभाष लिये! फूलों का जनाजा निकला आग का उच्छ्वास लिये!! हृदयविदारक घटना यह सुरत का मंजर था! सबके हाथ मोबाइल थी और मौत का तांडव था!! कई जानें बच जाती इक चादर भी तान दिया होता! इंसान होकर गर इंसानियत का पैगाम दिया होता!! कई जिंदगियां बुझ गई मन में मदद की आस लिये! फूलों का जनाजा निकला आग का उच्छ्वास लिये!! सब थे कोस रहे सत्ता को हाथ पे हाथ धरे बैठे! भूल कर अपने कर्तव्यों को विडियो क्लिप बना बैठे!! आज के युग में क्या ये मानवता का सूचक है? कहे कवि ‘प्रेम’ आज ये कलयुग का द्योतक है!! शुक्रवार का काला दिन था मौत का संत्रास लिये! फूलों का जनाजा निकला आग का उच्छ्वास लिये!! -जी.एल. Poem on Surat Agni kand: dekhate rahe maut ka manjar haathon mein doorabhaash liye! phoolon ka janaaja nikala aag ka uchchhvaas liye!! hrdayavidaarak ghatana yah s...