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GHAZAL: तेरी याद

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                                   आज फिर से तेरी याद आने लगी है। याद आकर मेरा दिल जलाने लगी है। कहा था ये मुझसे तू है सिर्फ़ मेरी। तू फ़िर मुझसे क्यों दूर जाने लगी है।। रही है मेरी सारी ख्वाहिश अधूरी । तू अश्कों में मुझको डुबाने लगी है।। मोहब्बत का मेरे ये कैसा सिला है। मुझे जाने क्यों आजमाने लगी है।। तुझे भूल पाए ना शायद अयन ये। मगर तू मुझे अब भूलाने लगी है।।             - जी एल पटेल 'अयन

Saraswati Vandana सरस्वती वंदना

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  yadon ka sawan सरस्वती वंदना ************** नमामि हे बागेश्वरी! नमामि पुस्तकधारिणी, नमामि हे चित्रांबरा! नमामि विंध्यवासिनी। मस्तक तिलक करी अर्चना। करबध्द हो करी वन्दना।। हरो उर तम सदा मां। कृपा करो पद्मासना।। नमामि माते तारिणी! नमामि पुस्तकधारिणी!! नमामि हे..!! अर्पित करी सब सर्जना। लेखनी की व्यंजना।। सदा सुर-सरिता बहे। कृपा करो पद्मलोचना।। नमामि माते कामिनी। नमामि पुस्तकधारिणी!! नमामि हे..!!                                                         - जी.एल.

कीमत आंसुओं की तुम चूकाओगे क्या। New Ghazal

 कीमत आंसुओं की तुम चूकाओगे क्या। आंसू सुखे हैं अभी और रुलाओगे क्या।। दिल की जज्बातों को तुम समझ पाते नहीं। दिल के रिश्ते को तुम समझ पाओगे क्या।। इतना आसान नहीं है मोहब्बत का सफर। इन रास्तों पर उम्र भर चल पाओगे क्या।। सुना है आजकल तुम कवि हो गए हो। मेरी भावनाओं को लिख पाओगे क्या।। दर्द औ गम जो खाई है मैंने तन्हाइयों में। बनाकर ग़ज़ल उसे तुम सुनाओगे क्या।। औ बहते हैं जो ख्वाब मेरे अश्क बनकर। उन ख्वाबों को दिल में सजाओगे क्या।। नसीबों से मिलते हैं हमसफर जिंदगी के। अपना हमसफर मुझे बनाओगे क्या।। जन्मों जन्मों का है रिश्ता हमारा। हर जनम में मेरा साथ निभाओगे  क्या- जी एल..

श्रद्धांजलि

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श्रद्धांजलि में उनकी, आज आंखें नम करें! आइए पुण्य स्मृति में , माता जी को नमन करें!!- जी.एल. "यादों का सावन" ****************** आज खामोश है धरती, रोया सा ये गगन है ! वीरान सी जिंदगी है, और "यादों का सावन" है!! वो जुदाई के दिन,  ये तन्हाई के दिन!  कैसे कटे ये जिंदगी, ऐ मां तेरे बिन !! मुझ पे ढाये तूने ! खुदा ये कैसी सितम है!! वीरान सी... बुझती हुई जिंदगी को, एक रोशनी तूने दी थी! मुझे गले से लगा कर, तुम्हें जो खुशी मिली थी!! गोंद में भर लेना फिर से! मां तुम्हें मेरी कसम है!! वीरान सी जिंदगी है, और "यादों का सावन" है!! --जी.एल.

Shayari and ghazal

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Yadon ka sawan  मां सरस्वती को प्रणाम करता हूं!  आप सभी को नमन ! मंच को चरण स्पर्श !! मैं चार-चार लाइनों से आप से जुड़ने का प्रयत्न  करूंगा!!  सुनिएगा...... १)कभी दुनियां से हारा तो तुम्हारे पास आता हूं!   कभी गम ने पुकारा तो तुम्हारे पास आता हूं!!  कभी तन्हां जो बैठूं तो तुम्हारी याद आती है!  कहर यादें जो ढाती हैं तुम्हारे पास आता हूं !! २) मेरा दिल सूना सूना है तेरी यादें सताती है ! तड़प उठता हूं मैं अब भी अगर तूं रूठ जाती है ! कि मर जाऊंगा मैं इक दिन तेरी चाहत में ओ यारा ! अब तो महफिल में भी तेरी याद सताती है !! ३) सफर तेरी मोहब्बत की बड़ी हसीन लगती है ! तेरी चाहत में ये दुनियां बड़ी रंगीन लगती हैं !  मेरी चाहत को ऐ मेरे खुदा सलामत यूं ही रखना !  कि उनकी यादों में जहां संगीन लगती है !! ४) अगर तेरी मोहब्बत में, मर जाऊं तो क्या गम है !  समेटो तुम अगर दिल से बिखर जाऊं तो क्या गम है !!  तेरा दिल ही मेरा आशियाना है सनम अब तो !  मेरी मंजिल तो तू ही है इधर आऊं तो क्या गम है !! -जी.एल. .......................................... और अ...

जी मैं ऐसे ही फाग मनाऊंगा, Holi Song

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  *जी मैं ऐसे ही फाग मनाऊंगा* ---------------------------------- चूक गयी इस बार की होली, अगली बार गुलाल लगाऊंगा! अबकी चेहरा लाल पीला , हरा गुलाबी कर जाऊंगा!! जी मैं ऐसे ही फाग मनाऊंगा!!-२ गुलाबी गालों पर आपके, रंग हमारे नाम की होगी! अबकी होली में राधा फिर, अपने घनश्याम की होगी!! आपके हर प्रश्नों का , मैं उत्तर बन जाऊंगा!! जी....-२ जाने कितने वर्षों से, इंतजार जो करवाया हूं! जाने अनजाने में आपके, आंखों में आंसू जो लाया हूं!! इस होली में गले लगा कर, सारे शिकवे मिटाऊंगा!! जी मैं ऐसे ही फाग मनाऊंगा!!-२                                   -जी.एल.

।।दिवाली गीत।। Happy Diwali Poetry

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              ।।दिवाली गीत।। इस दिवाली प्रीत से कुछ कर दिखा दो ! मुक़द्दर को मोहब्बत का असर दिखा दो !! जमाना जानता है प्रेम के उजास को , फेंक दो उतार के तुम जुर्म के लिबास को ! अनंत दीप जल उठेंगे, एक दीप जला तो दो, हौसला रखो तुम बदल दोगे इतिहास को!! ख्वाब को यथार्थ का सहर दिखा दो !! जईफ से तुम्हारा जो प्रेम का संबंध हो, हर गरीब को जो वस्त्र का प्रबंध हो ! शीत न  जमा सके अबकी इंसान के रक्त को, है नमन सौ बार मेरा प्रेम के इस भक्त को !! प्रण करो जग से मुफलिसी रुखसत करा दो ! मुक़द्दर को मोहब्बत का असर दिखा दो !! - जी.एल. जईफ - बुजुर्ग  मुकद्दर - भाग्य  उजास- प्रकाश लिबास - पहनावा सहर- सुबह मुफलिसी - गरीबी रुखसत - विदाई