श्रद्धांजलि
श्रद्धांजलि में उनकी,
आज आंखें नम करें!
आइए पुण्य स्मृति में ,
माता जी को नमन करें!!- जी.एल.
"यादों का सावन"
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आज खामोश है धरती,
रोया सा ये गगन है !
वीरान सी जिंदगी है,
और "यादों का सावन" है!!
वो जुदाई के दिन,
ये तन्हाई के दिन!
कैसे कटे ये जिंदगी,
ऐ मां तेरे बिन !!
मुझ पे ढाये तूने !
खुदा ये कैसी सितम है!! वीरान सी...
बुझती हुई जिंदगी को,
एक रोशनी तूने दी थी!
मुझे गले से लगा कर,
तुम्हें जो खुशी मिली थी!!
गोंद में भर लेना फिर से!
मां तुम्हें मेरी कसम है!!
वीरान सी जिंदगी है,
और "यादों का सावन" है!!
--जी.एल.

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