Pagli ladki Hindi poem, पगली लड़की
पगली लड़की
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उनकी यादों का सावन जब दिल में बस जाती है!
जब नाम 'प्रियु' का दिल की धड़कन बन जाती है!!
जब थका हांरा सूरज क्षितिज में ढल जाता है!
जब अम्बर में चंदा को, जी देख देख ललचाता है!!
जब सुबह से शाम टक एक नाम जुबां पर होता है!
जब महफ़िल में होकर भी एक दिल तड़प के रोता है!!
तब उसकी यादों के बिन जीना दुस्वारी लगती है!
और वो पगली लड़की कुछ और भी प्यारी लगती है!!
जब चांदनी रातों में शशि नभ में शोभित होता है!
जब नीले अम्बर में तेरा चेहरा सुरभित होता है!!
जब ओस की बुँदे कलियों को छू जाती है!
जब मोतियों की कतारें धरती पर बिछ जाती है !!
जब मंद हवा के झोके गालों को सहलाती है !
जब बागों में कोयल तेरी यादों का गीत सुनाती है!!
जब मेहंदी लगे हाथो की स्पर्श सुहानी लगती है!
जब लौकिक प्रेम की भाषा दिल को रूहानी लगती है!!
जब मुस्करना उसका जान से प्यारी लगती है!
तब उस पगली लड़की के बिन जीना दुस्वारी लगती है!
और वो पगली लड़की कुछ और भी प्यारी लगती है!!
जब अम्बर में चहुँओर घटा घनघोर गरजते है!
जब प्यासी धरती पर मृदु बूँदें बरसती है!!
जब नव कोपलों से पल्लव कुसुमित होते हैं!
जब भ्रमर की कतारें मधु से सिंचित होते है!!
जब संपूर्ण धरा इक नई दुल्हन सी लगती है!
जब मंद पवन के झंकारों की राग दिलों में बजती है!!
जब अम्बर से धरती तक हरियाली छा जाती है!
जब तरु आसीन खग मधुर स्वरों में गाती है!!
जब वो प्राणसंगिनी प्यारी सुकुमारी लगती है!!
तब उस पगली लड़की के बिन जीना दुस्वारी लगती है!
और वो पगली लड़की कुछ और भी प्यारी लगती है!!
जब दोस्तों की महफ़िल में जाम का तराना होता है!
जब पिते हैं तेरी यादें यादों का फ़साना होता है!!
जब तेरे नाम का पटियाला बनकर आता है !
जब मधु से ज्यादा तेरी यादों का नशा चढ़ जाता है!!
जब मधु के खुमारी से पग डगमग होते हैं!
जब पृथ्वी की गति का एहसास जगमग होते है!!
जब मधु के प्याले में तेरा चेहरा दिखने लगता है!
जब शुन्य क्षितिज में कुछ हलचल सी लगने लगती है!!
जब रात का चढ़ा दिन में खुमारी लगती है!!
तब उस पगली लड़की के बिन जीना दुस्वारी लगती है!
और वो पगली लड़की कुछ और भी प्यारी लगती है!!-
जी एल.
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